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अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा

अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा

भूल कर भी ना सोएं 15 अक्टूबर को यह अमृत की वेला है-

अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। वैसे तो हर माह पूर्णिमा होती है, लेकिन शरद पूर्णिमा की बात ही कुछ और है। इस बार शरद पूर्णिमा 15 अक्टूबर, शनिवार को है। हिंदू पुराणों के अनुसार माना जाता है कि शरद पूर्णिंमा की रात को चांद पूरी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। इस दिन चांदनी सबसे तेज प्रकाश वाली होती है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत गिरता है। ये किरणें सेहत के लिए काफी लाभदायक हैं। जानिए शरद पूर्णिमा इतनी खास क्यों है। इस दिन क्या-क्या होता है अनोखा…

श्री कृष्ण रास रचाते हैं

धर्म ग्रंथों के अनुसार माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन श्री कृष्ण गोपियों के साथ रास लीला भी करते हैं। इस दिन चंद्रमा चौंसठ कलाओं से युक्त होता है इसलिए श्री कृष्ण ने रास लीला के लिए इस दिन को चुना।

माँ लक्ष्मी निकलती हैं भ्रमण पर

साथ ही माना जाता है कि इस दिन माँ लक्ष्मी रात के समय भ्रमण में निकलती हैं यह जानने के लिए कि कौन जाग रहा है और कौन सो रहा है। उसी के अनुसार माँ लक्ष्मी उनके घर पर ठहरती हैं। इसीलिए इस दिन सभी लोग जगते हैं। जिससे कि माँ की कृपा उन पर बरसे और उनके घर से कभी भी लक्ष्मी ना जाए।

इस दिन होता है ऋतु परिवर्तन

अगर शरद पूर्णिमा को वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से देखा जाए तो माना जाता है कि इस दिन से मौसम में परिवर्तन होता है और शीत ऋतु की शुरुआत होती है।

क्यों खाते हैं खीर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन चंद्रमा से अमृत बरसता है इसलिए सभी लोग छत पर खीर बना कर रखते हैं। दूसरी ओर इस दिन खीर खाने को माना जाता है कि अब ठंड का मौसम आ गया है इसलिए गर्म पदार्थों का सेवन करना शुरु कर दें। ऐसा करने से हमें ऊर्जा मिलती है।

शरद पूर्णिमा का चाँद होता है बेहद फायदेमंद

शरद पूर्णिमा का चांद सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इसकी चांदनी से पित्त, प्यास, और दाह दूर हो जाते हैं। दशहरे से शरद पूर्णिमा पर रोजाना रात में 15 से 20 मिनट तक चांदनी का सेवन करना चाहिए।

वैद्य इसी चांदनी की रोशनी में बनाते हैं जड़ी-बूटी

शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में चाँद को एकटक देखने से आपकी आंखों की रोशनी बढ़ेगी। साथ ही इसी दिन वैद्य लोग अपनी जड़ी-बूटी और औषधियां चांद की रोशनी में बनाते हैं। जिससे यह रोगियों को दुगुना फायदा दे।

शरद पूर्णिमा को इन शब्दों में भी समझ सकते हैं

आज के दिन का आध्यात्मिक पक्ष इस प्रकार होता है कि जब मानव अपनी इन्द्रियों को वश में कर लेता है तो उसकी विषय-वासना शांत हो जाती है। मन इन्द्रियों को वाश में कर अपनी शुद्ध अवस्था में आ जाता है। मन निर्मल एवं शांत हो जाता है, तब आत्मसूर्य का प्रकाश मनरूपी चन्द्रमा पर प्रकाशित होने लगता है।

तो इस शरद पूर्णिमा सिर्फ खीर ही नहीं प्यार भी बांटिये, क्योंकि असल मायने में अमृत्व उसी में होता है।

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