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आधुनिक चिकित्सा शिक्षा पर आईएमए का सीधा कदम

आधुनिक चिकित्सा शिक्षा पर आईएमए का सीधा कदम

@dwarkaexpress

आयुर्वेदा शिक्षा के संशोधन नियमों की अधिसूचना को वापस लिया जाए: आईएमए

सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) द्वारा उल्लंघन और अतिक्रमण के स्तर से राष्ट्र के सभी आधुनिक चिकत्सा पेशेवर विश्वासघात महसूस कर रहे हैं। आईएमए पोस्टग्रेजुएट आयुर्वेदा शिक्षा के संशोधन नियमों से संबंधित अधिसूचना को वापस लेने की मांग करता है। अधिसूचना में एमएस शल्य तंत्र (सामान्य सर्जरी) नाम के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। शल्य तंत्र और शालक्य तंत्र के अंतर्गत आधुनिक चिकित्सा सर्जिकल प्रक्रियाओं की एक लंबी लिस्ट को शामिल किया गया है। ये योग्यताएं आधुनिक चिकित्सा के दायरे, अधिकारियों और अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, जिन्हें तत्कालीन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने एमएस (सामान्य सर्जरी) नाम के पोस्टग्रेजुएट कोर्स के लिए योग्य माना है।
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉक्टर राजन शर्मा ने बताया कि, “आयूष मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें दावा किया गया है कि तकनीकी शर्तें और आधुनिक विकास मानव जाति की सामान्य विरासत हैं। आईएमए इस स्पष्टीकरण को अस्वीकार करता है क्योंकि यह चिकित्सा प्रणालियों को मिलाने का एक भ्रामक छलावरण है। यह चिकित्सा शिक्षा और व्यवहार के मिश्रण पर एक कठोर प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है। सीसीआईएम संशोधनों को अलग दृष्टिकोण के साथ नहीं देखा जा सकता है।

डॉक्टर राजन शर्मा ने अधिक जानकारी देते हुए कहा कि, “प्रणालियों को मिलाने का उद्देश्य विरासत के झूठे दावों से बनाया गया है। कोलकाता, चिन्नई और मुंबई के मेडिकल कॉलेज 19वीं सदी में बनाए गए थे इसलिए ये मनुष्य की विरासत है। मलेरियल पैरासाइट और इसका इलाज जैसी कुछ जानी-मानी खोजें भारत में की गईं थीं। आधुनिक चिकित्सा जितनी दूसरों की है उतनी ही भारत की भी है। आधुनिक चिकित्सा में तेजी से प्रगति जैसे कि टीबी का टीकाकरण और कीमोथेरेपी भी भारत में शुरू किया गया था। भारत आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा देखभाल के साथ आधुनिक चिकित्सा के मामले में सबसे आगे है और प्रसिद्ध भारतीय डॉक्टर पूरी दुनिया की सेवा में जुटे हुए हैं। ऐसी विरासत और नेतृत्व को खोने का क्या मतलब है? ”
आईएमएस अस्तित्व और पहचान के लिए लंबे समय तक संघर्ष करने के लिए तैयार है। विशिष्टताओं और छात्रों सहित बिरादरी के सभी संघ इस बेकार सलाह का विरोध करने के लिए तैयार हैं। भारतीय पीढ़ियों का स्वास्थ्य खतरे में है। आईएमए की केंद्रीय कार्य समिति को आपातकालीन सत्र के लिए बुलाया गया है। 28 राज्य साखाओं को अपनी राज्य कार्य समितियों को संभालने का निर्देश दिया गया है। स्थिति की पहली अखिल भारतीय प्रतिक्रिया की मात्रा और समय को निर्धारित किया जा रहा है। किसी भी स्थिति में यह बुद्धवार, 2 दिसंबर 2020 के बाद नहीं होगा।”

 

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