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कर्नाटक चुनाव – सात दिग्गजों का शक्ति परिक्षण

यूं तो कर्नाटक में 224 सीटों में से 223 सीटों पर लगभग तीन हजार उम्मीद्वारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी है, इन सब के बीच कुछ ऐसे दिग्गज नेता हैं जिन पर सबकी नजरें होंगी । कर्नाटक चुनाव में अगर सबसे ज्यादा किसी की साख दांव पर है तो वो है सत्तारुढ़ पार्टी बीजेपी । किसी दक्षिण भारतीय राज्य की सत्ता का स्वाद पहली बार चख चुकी बीजेपी इसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहती । मुदद्दे कई हैं, नेता भी कई हैं, लेकिन इन सब के बीच में हैं कर्नाटक के वो सात सूरमा जिनका महत्व जितना अब है शायद नतीजे आने के बाद कई गुना बढ़ जाए । आइये देखते हैं कौन हैं कर्नाटक के वो सात दिग्गज ।

कर्नाटक के पहले दिग्गज है बी.एस.येदियुरप्पा -ये वो नेता हैं जिन्होंने बीजेपी को पहली बार किसी दक्षिणी राज्य में सत्ता का सुख दिलाया । लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे येदियुरप्पा का आज का सबसे बड़ा लक्ष्य है बीजेपी को सत्ता से बाहर करना । कांग्रेस ने उनकी दोस्ती के प्रस्ताव को ठुकराकर उनके इरादों को झटका दिया हो, लेकिन लिंगायत समुदाय में अपने प्रभाव के चलते वो बीजेपी को मुश्किल में डाल कर चुनावों के बाद किंगमेकर की भूमिका में नज़र आ सकते हैं ।

कर्नाटक के दूसरे दिग्गज हैं जगदीश शेट्टर– मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर पर पहले तो येदियुरप्पा का हाथ बना हुआ था पर अब हालात बदल चुके हैं और वैसे भी शेट्टर का नाता बीजेपी आरएसएस और जनसंघ से ज्यादा पुराना है, लेकिन फिर भी योग्य और अच्छी छवि वाले इस लिंगायत नेता के लिए येदियुरप्पा को पीछे छोड़ना आसान नहीं होगा ।

कर्नाटक के तीसरे दिग्गज हैं एस.एम.कृष्णा- एस.एम.कृष्णा की खूबी है जोरदार वापसी करना । आजकल कृष्णा का करियर खत्म होने की बाते होती रहती हों, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाकर महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाये जाने के बाद जिस तरह वापसी करते हुए कृष्णा ने जैसे विदेश मंत्री जैसा बड़ा ओहदा हासिल किया उसे देख कर कहा जा सकता है कि कांग्रेस की जीत की स्थिति में नेता पद की दौड़ में कृष्णा फिर उभर के सामने आ सकते हैं ।

कर्नाटक के चौथे दिग्गज हैं सिद्धरमैया- जनता दल से रुठ कर पिछली बार कांग्रेस का दामन थामने वाले सिद्धरमैया को पिछली बार भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना गया था । इस बार सिद्धरमैया का प्रभाव और कद में बढ़ोतरी हुई है । अति पिछड़ो में लोकप्रिय कुरुबा नेता सिद्धरमैया की भी किस्मत भी अचानक ही चमक सकती है ।

कर्नाटक के पांचवें दिग्गज हैं मल्लिकाअर्जुन खड़गे – 1972 से लगातार चुनाव जीतने वाले कांग्रेसी नेता मल्लिकाअर्जुन ख़डगे एसएम कृष्णा के बाद कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं। लेकिन दलित समाज से आने की वजह से मल्लिकाअर्जुन खड़गे का महत्व और भी बढ़ जाता है। जानकारों का मानना है सत्तर साल के खडगे का नंबर पिछले ही चुनाव में आ गया था लेकिन वो चूक गए थे । लेकिन खडगे का कर्नाटक में वापसी की संभावनाओं से पूरी तरह से इनकार नहीं किया जा सकता है|

कर्नाटक के छठे दिग्गज हैं एच डी कुमारस्वामी – कर्नाटक के अपने वोक्कालिगा समर्थको और राजधानी के आस-पास बेहतर प्रभाव रखने वाले एच डी कुमारस्वामी पिछली बार के मुकाबले थोड़े मजबूत नजर आ रहे हैं । पूर्व प्रधानमंत्री के पुत्र और पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी इस बार बीजेपी राज के भ्रष्टाचार को सामने लाने और उसका विरोध करने में सबसे आगे रहे जिसका फायदा उन्हे नंबर दो पार्टी के तौर पर मिल भी सकता है|

कर्नाटक के सातवें दिग्गज हैं के.एस.ईश्वरप्पा –1989 से लगातार विधायक और अपने काम से नाम कमाने वाले ईश्वरप्पा का कद आज बीजेपी में काफी उंचा है और यही वजह है कि उन्हे राजस्व मंत्रालय जैसा विभाग मिला है । ईश्वरप्पा के इसी तेजी से बढ़ते प्रभाव की वजह से ही शायद येदियुरप्पा ने उन्हे मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया । उनपर पिछड़ो के वोट बीजेपी की झोली में लाने का सबसे बड़ा दारोमदार है और कामयाब होने की स्थिति में वो ईनाम पाने के हकदार भी हो सकते हैं । अब देखना ये है कि इन सात दिग्गजों में से कौन चुनाव के बाद कर्नाटक का सबसे बड़ा दिग्गज बन कर सामने आता है ।

मुकेश कपिल

One comment

  1. ashok mehrotra

    ab bjp waha shor machana shuru karegi yeh ghotala wo ghotala etc etc.jo maniey dekha hai inhoney delhi mey bureacracyko party line par divide kiya,yeh congress ka bureacrate yeh blp ka,is tarah samaj ko divide kiya.inka muslim rastrabhkat,congress ka muslim gaddar,inka hindu,hindu doosra hindu bharoseymand nahi.inka neta pakistani se shadi karey deshbhakat kahlayey,jinna ka majar par fathiha padey koi baat nahiyaha hinduo ko ram ke naam par batey koi baat nahi yeh rastrabhakat doosra gaddar.yeh hey inka asli chera,chaal chartitra.jis 2g ghotaley ki baat kartey haius report mey anuman word tha yeh nahi tha ki itna loss hua par apney faydey key liyey shor machatey rahey.teekh baat par shor machana sansad na chalney dena samajh me aata hai par har session ko is tarah na chalney dena samajh se bahar hai.

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