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क्या सरकार पर लगे ये दाग भी अच्छे है..?

Scams in India

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2जी घोटाला हो या फिर कोयला ब्लॉक आवंटन दोनो ही मामलों में जेपीसी की रिपोर्ट जब से आई है देश का राजनीतिक माहौल ऐसा हो गया है जैसे अब से कुछ ही दिनों में अगले लोकसभा चुनाव होने वाले हैं..वैसे तो राजनीतिक दल अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुटे थे लेकिन जेपीसी रिपोर्ट के जरिये सरकार ने अपने दाग धोने की कोशिश की है । जेपीसी रिपोर्ट में 2002 तक के सभी कोयला ब्लॉक आवंटनों को अवैध करार दिया गया है और अब सरकार का रवैया कुछ ऐसा है जैसे पिछले कुछ समय में सरकार के उपर 2जी और कोयला ब्लॉक को लेकर जो दाग लगे थे वो दाग अच्छे हैं..! हालांकि इस सब के बीच सबसे बड़ी परेशानी मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के लिए उभर कर सामने आई है जिसके अब तक के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का नाम इस जेपीसी की रिपोर्ट में आया है..ऐसे में सरकार को घेरने वाली बीजेपी के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है कि जेपीसी की ये रिपोर्ट आने वाले चुनावों में कांग्रेस या युपीए के लिए हथियार के साथ साथ कहीं भ्रष्टाचार औऱ घोटालों के आरोपो की ढाल ना साबित हो जाए..बस बीजेपी के लिए राहत की बात ये है कि सिर्फ एनडीए ही नहीं पूरा विपक्ष इस जेपीसी रिपोर्ट के विरोध में आ खड़ा हुआ है ।

इस सब के बीच सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि आखिर सरकार ये जेपीपी जेपीसी का खेल कब तक खेलेगी क्या कैग जैसी विश्वसनीय संस्था की रिपोर्ट को खारिज करना सही है..क्या सरकार के इस कदम से कहीं आने वाले समय में यही परंपरा तो कायम नहीं हो जाएगी कि अगर कैग सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए तो जेपीसी जैसी संस्थाओं के माध्यम से कैग पर ही सवाल उठा कर अपने दागों को साफ करने की असंसदीय कृत्य को बढ़ावा दिया जाए..निश्चित ही सरकार को यह सोचना होगा कि अपने आज को संवारने के उद्देश्य से कहीं सरकार भविष्य की राजनीति को औऱ ज्यादा खतरनाक तो नहीं बना रही जिसमें कैग और जेपीसी जैसी संस्थाएं कही एक दूसरे पर आरोप लगाने का माध्यम या सरकारी कठपुतली बन कर रह जाएं जैसे आज के दौर में सीबीआई को माना जाने लगा है ।

मुकेश कपिल

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