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डॉ. बिस्वरूप ने “मॉडर्न स्लेवरी- ट्रुथ नेवर टोल्ड” के आधार पर एक बुक लांच का आयोजन किया

डॉ. बिस्वरूप ने “मॉडर्न स्लेवरी- ट्रुथ नेवर टोल्ड” के आधार पर एक बुक लांच का आयोजन किया

 

डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी (पी.एच.डी डायबिटीज) अपनी मशहूर डी.आई.पी डाइट की वजह से जाने जाते है। डॉ. बिस्वरूप ने 23 दिसंबर 2021 को एल.टी.जी ऑडिटोरियम में एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया जिसमे उन्होंने अपनी नई किताब “1 क्वेश्चन दैट कैन सेव यौर लाइफ” को लांच किया। कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने जनवरी 2021 जर्नल ऑफ़ साइंस ऑफ़ हीलिंग आउटकमस (Vol. 13 issue 50) में प्रकाशित अपना लेटेस्ट रिसर्च पेपर भी सभी लोगों को दिखाया।

उन्होंने रिसर्च पेपर के बारे में मीडिया को सम्बोधित किया और कहा कि मेडिकल साइंस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक टाइप 1 डायबिटीज के मरीज़ जो सात सालों से रोज़ाना लगभग 60 यूनिट्स इन्सुलिन की लेते थे और अब वह डी.आई.पी डाइट की बदौलत इन्सुलिन पर निर्भर नहीं है। उन्होंने अपनी डाइट में बदलाव कर इन्सुलिन के इंजेक्शंस से छुटकारा पाया। ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट द्वारा भी स्पोंडिलोसिस मरीज़ों पर डी.आई.पी डाइट का क्लीनिकल ट्रायल किया और सकारात्मक नतीजा पाया।

उनका कहना है कि इस किताब को पढ़ने के बाद आप उन सभी डॉक्टरस के पास जाना बंद कर देंगे जो आपको कीमोथेरपी, रेडियोथेरेपी, सर्जरी, वैक्सीनेशन लेने की सलाह देते है। वह अपनी पुस्तक में आगे बताते हैं कि किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले, अपने डॉक्टर से सबसे महत्वपूर्ण सवाल पूछें कि आपके पास ‘क्या सबूत हैं, कि इस उपचार को लेने से, मैं अपने जीवन काल को बढ़ाने में सक्षम रहूँगा या अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर पाउँगा, हो सकता है कि आपका डॉक्टर इस प्रश्न का उत्तर देने में असहज महसूस करे।

बुक लांच के दौरान डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी, पी.एच.डी ने कहा कि “क्या मॉडर्न दवाइयाँ, साक्ष्य पर आधारित है?” चाहे फिर कैंसर हो, दिल की बीमारी हो या डायबिटीज हो यहाँ तक कि रेगुलर हेल्थ चेक अप भी हो तो सबूतों के आधार पर यह बिल्कुल साफ़ है कि ट्रीटमेंट लेना ट्रीटमेन्ट न लेने से ज़्यादा हानिकारक हो सकता है।”

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