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पर्यावरण दिवस के संदर्भ में – रमेश मुमुक्षु के शब्दों में

पर्यावरण दिवस के संदर्भ में – रमेश मुमुक्षु के शब्दों में

जब तक भारत में बहने वाली समस्त नदियां अपने उद्गम से विलीन होने तक अविरल , निर्मल और निर्बाध अपनी नैसर्गिक गति से  नही बहेगी , उसकेकिनारे , कब्जा मुक्त नही होंगे।
safe earth
जब हमें अपने को विकसित अथवा विकासील कहने का कोई अधिकार नही।
ऐसी तरक्की जो प्राकृतिक स्रोतों को नष्ट करके हो, वो तरक्की नही मानी जा सकती।
अगर हम इस दृष्टिकोण से सोचने लगेंगे , तब ही हमारे भीतर इन प्राकृतिक संसाधनों के प्रति आदर जागेगा और हम संवेदनशील होना शुरू होंगे।
तब देश  में कुछ करने का जज्बा पैदा होगा।
अभी ये सब प्राकृतिक जल स्रोतों के प्रति हमारी संवेदनशीलता जगी नही।
इस बात को हमेशा अपने भीतर जीवित रखना होगा। केवल उपभोग के लिए नही है। ये जीवन का  आधार है , पृथ्वी  में जल से ही जीवन है।ये भी नही भुलाना चाहिए कि ये जल मात्र मानव के लिए नही है।
ये मानव के प्रादुर्भाव से पहले ही अस्तित्व में था।
अभी तक मानव ने केवल अपने लिए ही इसका प्रयोग और उपयोग किया है।
अब समग्रता से सोचना ही होगा। कल्पना करें , अगर  एक दिन के  सारे जलस्रोत न रहें तो क्या होगा?
इसलिए विकास केवल और केवल प्राकृतिक जल स्रोतों को पूर्णतः अक्षुण्ण रखते हुए ही हो ,तभी सतत विकास की अवधारणा की और मानव का पहला कदम होगा। कम से कम भारत के नागरिकों का।
भारत के नागरिक में सरकार भी भी शामिल है।
स्मरण रखें।
रमेश मुमुक्षु

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