Home / Entertainment / फिल्म चक दे! इंडिया का टाइटल ट्रैक 7 बार बनाया गया और हर बार खारिज हुआ; संगीतकार जोड़ी सलीम-सुलेमान ने टाइम्स ऑफ म्यूज़िक में किया खुलासा
फिल्म चक दे! इंडिया का टाइटल ट्रैक 7 बार बनाया गया और हर बार खारिज हुआ; संगीतकार जोड़ी सलीम-सुलेमान ने टाइम्स ऑफ म्यूज़िक में किया खुलासा

फिल्म चक दे! इंडिया का टाइटल ट्रैक 7 बार बनाया गया और हर बार खारिज हुआ; संगीतकार जोड़ी सलीम-सुलेमान ने टाइम्स ऑफ म्यूज़िक में किया खुलासा

@shahzadahmed

संगीतकार जोड़ी सलीम-सुलेमान प्यारेलालजी के साथ एमएक्स ओरिजिनल सीरीज़- टाइम्स ऑफ म्यूज़िक के पहले एपिसोड में नज़र आएंगे। टाइम्स ऑफ म्यूज़िक एक अनोखी संकल्पना है जिसमें दो अलग-अलग युग के संगीतकार एक-दूसरे के मशहूर गानों के पीछे के सिद्धांतों, इसकी नीतियों के बारे में बात करेंगे और एक नयी धुन बनाने के लिए उसे अपने तरीके से इंटरप्रेट करेंगे। जहाँ एक ओर सलीम-सुलेमान प्यारेलालजी का ‘मेरे मेहबूब कयामत होगी’ अपनी आवाज़ में गाएंगे, वहीं प्यारेलालजी सलीम-सुलेमान के ‘शुक्रान अल्लाह’ का उनका वर्जन पेश करेंगे।इस सीरीज़ के होस्ट विशाल ददलानी के साथ बातचीत के एक भाग में, सलीम-सुलेमान ने शाहरूख खान अभिनीत  चक दे! इंडिया के टाइटल ट्रैक के बारे में एक कहानी का खुलासा किया। इसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है कि किस तरह यह बेहद मशहूर ट्रैक एक बार नहीं, दो बार नहीं बल्कि सभी सातों बार खारिज हुआ।इस बारे में बात करते हुए सलीम मर्चेंट ने कहा, “हम लोगों ने एक फिल्म पर काम शुरु किया था (चक दे! इंडिया) तो हमने बोला कि हम एक सुपर्ब टायटल सॉन्ग बनाएँगे, पैट्रियोटिक (देशभक्ति) गाना। ऐसा गाना हो जिसमें एकदम फिल्म की जो पूरी आत्मा हो, उसका इस गाने में समावेश हो जाए। आदित्य चोपड़ा ने कहा, नहीं यार, ये गाना पकाऊ है। गाना ऐसा होना चाहिए कुछ मज़ेदार, यह एनर्जेटिक होना चाहिए, ताकि इंडिया कुछ गेम खेले तो ऐसा लगे की यार अपना गाना है। तो हमने एक ज़बरदस्ती का एक एनर्जेटिक गाना होता है, जिसकी कोई आत्मा नहीं होती, वो हमने कोशिश की, पर हमें ही पसंद नहीं आया वो। तो हमने ही रिजेक्ट कर दिया वो गाना। ऐसे 7 गाने बने।”7 बार प्रस्तुतीकरण तैयार किया गया लेकिन प्रत्येक वर्ज़न रिजेक्ट होने के बाद, संगीतकार जोड़ी ने फैसला किया कि शायद उन्हें फिल्म छोड़ देनी चाहिए। हाँलाकि, एक दिन आदित्य चोपड़ा उनके पास आए और उन्होंने जुम्मा चुम्मा की धुन पर गाया ‘चक दे चक दे इंडिया, चक दे चक दे इंडिया इंडिया’, जिसे सुनकर जोड़ी सोच में पड़ गई।


इसी पर विस्तार से बात करते हुए सलीम ने कहा, “7 गानों के बाद मैंने सुलेमान को कहा कि ये पिक्चर हम छोड़ देते हैं क्योंकि 7 रिजेक्शन्स मेरे लिए बहुत थे क्योंकि 1 या 2 को छोड़कर हमने बहुत मेहनत की थी बाकी के पाँचों गानों में। तो हुआ यह कि एक दिन आदित्य चोपड़ा आए और बोले सलीम जुम्मा चुम्मा ट्यून सुनी है क्या? मैंने बोला हाँ। कुछ तो वो गाने लग गए चक दे चक दे इंडिया, चक दे चक दे इंडिया इंडिया। मैने बोला आदि ये कैसे यार, जुम्मा चुम्मा के ट्यून पर कैसे गा रहे हो यह गाना? वह बोले मुझे जुम्मा चुम्मा नहीं चाहिए, लेकिन उसकी जो एनर्जी है ना, जो सेलिब्रेशन है, इंडिया को वो सेलिब्रेशन चाहिए। मैंने जयदीप को बोला एक काम करते हैं हम लिरिक्स के ऊपर पहले बैठते हैं। तो उसने पहले लिखा कुछ करिए कुछ करिए, नस नस मेरी खोले कुछ करिए। तो इस तरह से गाना बन गया।”इस सोच की शुरुआत के साथ संगीतकार जोड़ी ने फिर से इस पर काम शुरु किया और गीतकार जयदीप साहनी से गीत पर काम करवाया और उन्होंने लिखा ‘कुछ करिए कुछ करिए, नस नस मेरी खोले कुछ करिए’।  इस तरह गाना तैयार हुआ।लेकिन इतना ही नहीं था, फिल्म के संगीत में एक और मोड़ था!  मौला मेरे लेले मेरी जान की भी कोई प्लानिंग नहीं थी। इस बारे में सलीम ने बताया, “इस फिल्म में आखिर में शाहरूख जब वो तिरंगे को देखता है तो उसकी आँखों में आँसू आते हैं। तो वहाँ पर यश जी ने कहा कि यहाँ एक गाना चाहिए लेकिन फिल्म 1-2 हफ्ते में रिलीज़ होने वाली है। तो हमारे पास एक गाना था जो हमने फिल्म ‘डोर’ के लिए कंपोज़ किया था, यह गाना था जो तब रिजेक्ट कर दिया था। तो हमारे पास था यह गाना। तो मैंने यह गाना निकाला पिटारे से, कि चलो देखते हैं क्योंकि टाइम तो था नहीं और उसी दिन हमको गाना बनाना था। ”ऐसी ही कई और रोचक कहानियों और अपने पसंदीदा गानों की शानदार धुनों के बारे में और जानने के लिए स्‍ट्रीम करें ‘टाइम्‍स ऑफ म्‍यूजिक’ – इसके नए एपिसोड हर शनिवार और रविवार मध्‍यरात्रि एमएक्‍स प्‍लेयर पर ड्रॉप किए जा रहे हैं।

Dwarkaexpress.com

Tags #mxplayeroriginal #webseries
#timesofmusic

Scroll To Top