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हरियाली तीज आज जानें पूजा विधि – DwarkaExpress

हरियाली तीज आज जानें पूजा विधि – DwarkaExpress

हरियाली तीज आज, जानें पूजा विधि
Wednesday, July 26, 2017
*Hariyali teej Special by Sudhir Bhisnoi*

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सुहागन स्त्रियों की हर मनोकामना होगी पूरी! हरियाली तीज का व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती से मिलेगा अनोखा वरदान। पढ़ें इस पावन पर्व की महिमा…

हरियाली तीज सुहागन स्त्रियों से जुड़ा एक खास पर्व है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हरियाली तीज या श्रावणी तीज, श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर में यह तिथि जुलाई या अगस्त के महीने में आती है। चूंकि यह पर्व सावन के महीने में आता है इस समय वर्षा ऋतु होने से चारों ओर हरियाली ही हरियाली होती है इसी वजह से इसे हरियाली तीज कहा जाता है। ऐसे मौके पर महिलाएं सावन के झूले झूलती हैं और उत्सव मनाती हैं।

मुहूर्त

तृतीय तिथि आरंभ 09:59:58, 25 जुलाई 2017
अवधि 22 घंटे 10 मिनट
तृतीया तिथि समाप्त 08:10:37, 26 जुलाई ,2017

यह मुहूर्त नई दिल्ली के लिए है। जानें अपने शहर में हरियाली तीज का मुहूर्त

हरियाली तीज पर होने वाली परंपरा और पूजा विधि

शिव पुराण के अनुसार हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था इसलिए सुहागन स्त्रियों के लिए इस व्रत की बड़ी महिमा है। यूं तो यह सुहागन स्त्रियों का पर्व है लेकिन नवविवाहित लड़कियों के लिए विवाह के बाद पड़ने वाले पहले सावन के त्यौहार का विशेष महत्व होता है।

हरियाली तीज से पहले नवविवाहित लड़कियों के ससुराल से सिंजारा भेजे जाने की परंपरा है। इसमें श्रृंगार और अन्य सामग्री भेजी जाती है। इसी से तैयार होकर युवतियां और महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करती हैं।
पूजा से पहले चौकी रखी जाती है। इसके बाद मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, भगवान गणेश, माता पार्वती और उनकी सहेलियों की प्रतिमा बनाई जाती है और उनका षोडशोपचार पूजन किया जाता है।
हरियाली तीज व्रत की पूजा रात्रि में होती है। इस दौरान महिलाएं जागरण और कीर्तन भी करती हैं।
इस दिन सुहागन महिलाएं और युवतियां अपने हाथों पर मेहंदी लगाती हैं और झूले झूल व नाच-गाकर उत्सव मनाती हैं।

हरियाली तीज का पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए 107 जन्म लिए थे। उनके कठिन तप से 108वें जन्म में भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। ऐसा माना जाता है कि तभी से इस व्रत की शुरुआत हुई। ऐसा कहते हैं कि जो भी सुहागन स्त्रियां हरियाली तीज पर विधि विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं उन्हें सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही उनके दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 

सभी पाठकों को हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं !

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