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दिल्ली में स्मॉग (प्रदूषण) का खतरनाक रूप | dangerous smog level in delhi

दिल्ली में स्मॉग (प्रदूषण) का खतरनाक रूप | dangerous smog level in delhi

धुवें और धुंध के मिश्रण को स्मॉग कहते हैं। दिल्ली और उत्तर भारत इस समय स्मोग की गिरफत में है और इसी वजह से यहाँ की हवा में सांस लेना भी दिन में 40-45 सिग्रेटे पीने के बराबर है. और अभी भी दिल्ली के धुंध और प्रदूषण की स्थिति में कोई सुधार नहीं है, वास्तव में, समस्या को जटिल कहे तो गलत नहीं होगा.

विशेषज्ञ और डॉक्टर की माने तो स्मॉग हमारे स्वास्थ्य के लिये बहुत हानिकारक है। बच्चों, बड़े, बूढ़ो के लिए ये बहुत ही खतरनाक है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अकेले 2015 में प्रदूषण से 25 लाख भारतीयों की मृत्यु हो गई जो की दुनिया में प्रदूषण से मरने वालो की सबसे बड़ी संख्या आकी गयी है.

इतनी गंभीर समस्या को सिर्फ हमने सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने और मजाक करने तक ही सिमित कर दिया है. हमे इस गंभीर समस्या के खिलाफ कुछ तो ठोस कदम उठाने की तरफ ध्यान देना चाहिए। पिछले 3-4 सालो से उत्तर भारत इस समस्या से अत्यधिक ग्रस्त है और दिन पर दिन ये समस्या अपनी जड़े पकड़ती जा रही है. हम और हमारी सरकारे किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे है. हमे कोई सुपरमैन आकर नहीं बचने वाला. हमे इन समस्याओ से खुद ही लड़ना पड़ेगा.

अंतर्राष्ट्रीय प्रेस में भी कई सालों से कहा जा रहे हैं कि भारत की हवा, दुनिया में सबसे खराब और बीमार करने वाली हवा है। ग्रह के सबसे प्रदूषित हमारे देश में ही केंद्रित हैं।

पिटीशन पर सिग्नेचर करना, सोशल मीडिया पर शेयर करना, मास्क खरीद कर पहना, ओड-इवन चलना क्या यही हल है इस गंभीर समस्या का. सरकार को और हमे इस गंभीर समस्या के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। हमे बेहतर परिवहन विकल्पों की और ध्यान देना चाहिए, हमे चाहिए की हम ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम करे जिससे हमे प्रदूषण को कम करने में मदद हो.

*स्मॉग से होने वाली बीमारियों के प्रमुख लक्ष्ण*
– आंखे खुजलाना या आंखों में जलन होना
– ज़ुकाम , खांसी और गले मे इंफेक्शन
– सांस फूलना या सांस आने में तकलीफ होना
– टी बी, अस्थमा अथवा साइनस भी स्मॉग से होने वाले प्रमुख रोग हैं. इसके अलावा

*बचाव के उपाय*
– गुड़ या शहद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है, स्मॉग (प्रदूषण) से भी।
– काली मिर्च पीसकर चूर्ण बना लें, 1 चम्मच शहद में डालकर थोड़ा सा काली मिर्च पॉवडर डालकर खाने से फेफड़े साफ होते हैं और प्रदूषण का असर कम हो जाता है।
– फेस मास्क पहन कर ही घर से निकलें व मास्क को बार बार ना छुएँ। और ध्यान रखे सिर्फ PM2.5 या रेस्पिरेटर मास्क ही स्मोग से निजाद दिला सकता है. जागरूक न होने की वजह से लोग पटरी वालो से मास्क खरीद कर पहन रहे है.
– चश्मा पहन कर निकलें या अपने साथ रखे, जैसे ही आखों पर जलन लगने लगे तो तुरंत पहन ले.
– वापस घर आने पर अच्छी तरह हाथ मुँह धोएं गर्म पानी से कुल्ला करें व 1 ग्लास हल्का गर्म पानी पिएं।
– कोशिश करे की घर से बाहर न निकले. तभी निकले जब जरुरत हो नहीं तो ना निकले.

 

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