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खिचड़ी का इतिहास क्या है, चलिए जानते है कुछ अनजाने रहस्य

खिचड़ी का इतिहास क्या है, चलिए जानते है कुछ अनजाने रहस्य

भारत अपनी विविध्ता के लिए जाना जाता है. इसमें कोई दो राय नहीं यहाँ विभिन प्रकार के खाने, पहनावे, रंग हमे थोड़ी थोड़ी दूर पर देखने को मिलते है. आज इसी विविधता में से हम लेकर आये है हमारे सबके घरो में बनने वाली हुई खिचड़ी.

अगर खिचड़ी के इतिहास की बात करे तो सुनने में आता है सबसे पहली खिचड़ी बनी थी चावल और तिल से, और जिससे हम खीचड़े से नाम से जानते है. इसका नाम संस्कृत शब्द खिच्चा है, जिसका अनुवाद चावल और दालों से बनाया गया व्यंजन.

इतिहास में अबू फजल की ऐन-ए-अकबरी में खिचड़ी का जिक्र आता है. खास तरह की खिचड़ी राजा मेहमानो के लिए बनायीं जाती थी. शाही रसोईघर में तैयार किए गए खिचड़ी के कई संस्करणों का उल्लेख है, जिनमें केसर, खड़े मसाले और सूखे फल शामिल होते थे.

अगर हम आज की या आज से पहले हमारे दादा – दादी की पीढ़ी की बात करे तो, खिचड़ी एक हलके खाने के रूप में जानी जाती है और हम लोग इससे या तो बीमार होने पर या बहुत दिनों से बाहर का खाना खाने पर उपयोग में लाते है ताकि कुछ सेहत से भरपूर और हल्का खाना खा सके.

इसलिय हल्के खाने के नाम पर बहुत तरह की खिचड़ी हमारे देश में बनायीं जाती है. चलिए नज़र डालते है इनके विभिन्न विभिन्न प्रकार पर.

शुरूवात करते है नार्थ यानि उत्तर से. उत्तर में जनवरी के महीने में जो खिचड़ी बनती है वो चावल और काली उरद दाल से बनती है. और इस खिचड़ी की विशेषता ये है ये बासी यानि की एक रात पहले बनायीं जाती और अगले दिन खायी जाती है. ये मकर संक्रात पर विशेष रूप से बनायीं जाती है.

उत्तराखंड की पहाड़ी खिचड़ी ज्यादातर सादी होती है। यह खिचड़ी प्रसाद के रूप में जानी जाती है. यहां के ब्रदीनाथ मंदिर समेत कई जगह प्रसाद के रूप में खिचड़ी दी जाती है। इसे सीधे पानी में उबाल कर बनाया जाता है और प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.

वही हिमाचल प्रदेश में दाल चावल के साथ कुछ राजमा और सफ़ेद छोले डालकर खिचड़ी बनायीं जाती है. इसका स्वाद राजमा और सफ़ेद छोले, के साथ कुछ स्थानीय मसाले के मिश्रण के साथ अलग ही लगता है.

उत्तर प्रदेश के व्यंजनों में आवला का प्रयोग किया जाता है तो यहाँ की खिचड़ी में काली दाल, चावल के साथ आवला का प्रयोग कर विशेष खिचड़ी बनायीं जाती है और ये मकर संक्रांति के त्यौहार पर दान में भी दी जाती है.

राजस्थान राज्य अपने शाही खाने के लिए काफी जाना जाता है, तो ऐसा कैसे हो सकता है की आपको राजस्थान में खिचड़ी का स्वाद न मिले. यही की खिचड़ी दाल, गेहू और बाजरा की बनती है और इसकी विशेषता ये है इससे बहुत अच्छे से पकाया जाता है और ये काफी गरम तासीर की होती है और ये सर्दियों में राजस्थानी सब घरो में मिलती है.

अब आते है गुजरात की खिचड़ी पर, इसमें खासतौर से हल्दी और हींग का प्रयोग किया जाता है। गुजरात की खिचड़ी आमतौर पर पतली बनायीं जाती है और ज्यादातर कढ़ी और सुराती उंधनिया आदि के साथ परोसी जाती है।

महाराष्ट्र में साबूदाने की खिचड़ी प्रसिद्ध हैं। मुंबई महानगरी में खिचड़ी बहुत ही मसालेदार बनती है और लोग उससे काफी उत्साह से कहते है और इससे भी लजीज खाने में गिनते है. यहां के लोग तीखी खिचड़ी खाते हैं। यही साबूदाने की खिचड़ी उत्तर भारत में ज्यादातर व्रत के दौरान भी बनाई और खायी जाती है।

तमिलनाडु में मीठी खिचड़ी बनाई जाती है और इससे पोंगल कहा जाता है. इस खिचड़ी का बहुत महत्व है, और इसकी खासियत है कि इसे नमकीन भी बनाया जा सकता है. मीठी खिचड़ी यहां के मंदिरों में प्रसाद के रूप में बांटी जाती है.

आंध्र प्रदेश में कीमा खिचड़ी खाई जाती हैं। जिसमें ग्राउंड बीफ, चावल, दाल, सॉस के साथ इमली और तिल का मिश्रण होता है। और कई जगह लोग इसमें दाल का प्रयोग नहीं करते हैं।

कर्ऩाटक में खिचड़ी सब्जियों से भरपूर होती है। यहां की खिचड़ी में इमली, गुड़, मौसमी सब्जियां, कढ़ी पत्ता, सूखे नारियल का बुरादा और सेमल की रुई का इस्तेमाल किया जाता है। और ये काफी मज़ेदार होती है.

बंगाल में खिचड़ी का विशेष स्थान रूप है. और ये दुर्गा पूजा में भोग के रूप में प्रसाद में दी जाती है, जो तैयार होती है दाल, चावल और विभिन्न सब्जियों का. यहां की खिचड़ी मीठी होती हैं.

तो कहानी ये है की खिचड़ी हमे हर शहर, हर गांव, हर नुकड़ पर कुछ ट्विस्ट के साथ मिल जाएगी और वो भी अलग अलग स्वाद के साथ. इतना ही नहीं टीवी पर खिचड़ी सीरियल बहुत लोकप्रिय हुआ था अपने विभिन्न किरदारों को लेकर और लोगो के दिलो में एक विशेष जगह बनाने में कामयाब हुआ था.

इस साल, खिचड़ी को ब्रांड इंडिया फूड के रूप में चुना गया है तीन दिवसीय वर्ल्ड फूड इंडिया में, जिसका आयोजन 3 नवंबर, 2017 को दिल्ली में हुआ था, प्रसिद्ध शेफ संजीव कपूर 800 किलो की खिचड़ी की तैयारी की और तक़रीबन 60,000 अनाथ बच्चों के साथ-साथ इस समारोह में उपस्थित अन्य अतिथियों के लिए भी विशेष रूप से बनायीं गयी.

खिचड़ी पर विशेष: खिचड़ी के चार यार ,दही ,पापड़ ,घी और अचार’ और कही कही गुड़ भी.

रवि टोंडक

 

 

 

 

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