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समाज  को  जोड़ने  वाली  चीज़े  हमे  समाज  से  दूर ले  गयी | Impact of social media on daily life

समाज को जोड़ने वाली चीज़े हमे समाज से दूर ले गयी | Impact of social media on daily life

समाज  को  जोड़ने  वाली  चीज़े  हमे  समाज  से  दूर ले  गयी  

इंसान  समाज के  लिए  है , या  समाज  इंसान  के  लिए ?   ये  एक  ऐसा  प्रश्न  है  जिसका  जवाब  इंसान  अपने  हिसाब  से  बदलता  रहता  है . जरुरत  या  कहे अपने  स्वार्थ  के  हिसाब  से  नाप  तोल कर  अपने  हिसाब  से  सही  साबित  कर  देता  है |
सोशल  मीडिया  जैसे  फेसबुक , ट्विटर , इंस्टाग्राम  क्यों  आये ? देखा  जाए  तो  इनका   ईजाद  इसलिय  हुआ  ताकि  हम  समाज  को  एक  साथ  जोड़कर  रख  सके | परन्तु , आज  हम  समाज  को  जोड़ने  के  चक्कर  में , उस  कगार  पर  आ  खड़े  हुए  जहा  सिर्फ  एक  इंसान  पर  नकारात्मक  प्रभाव  ज्यादा  पड़ रहा  और वो  गलत  चीज़ो  को  भी  सही  मैंने  लगे | और  इस  मिथ  में  जीने  लगे  की  हम  ऐसे  ही  समाज  का  हिस्सा  है और ये हमारे विकास ही और एक कदम है |
सोशल  मीडिया  क्या  है , समाज  को  साथ  रखने  का , अपने  विचारो  को  रखने  का  एक  तरीका | सही  मायने  में  क्या  हम सोशल मीडिया का सदुपयोग  कर  रहे  है | कुछ  हद्द  तक  हां , पर  शायद  नकारात्मक  चीज़े  हमे  गलत  सोचने  पर  और  कई  बार  सिर्फ  किसी  के  व्यक्तिगत  विचार  पर  हम  भी बिना सोचे समझे  अपनी  मोहर  लगाकर , गलत  चीज़ो  के पक्ष में  मत  करते  है वो भी उसके  दूसरे  पहलु  को  बिना  सोचे  समझे | हिंदुस्तान  की  राजनीती  इसका  सबसे  बड़ा  उदहारण  है | लोग  बांटे  हुए  है  मोदी  भक्तो  में , केजरीवाल  चमचो  में  और  राहुल  बाबा  के  विचारो  में | क्या   हमारी  सोच  का  दयारा  इतना  ही सिमित हो गया  है  की  इसने  ये  बोला तो  ये  मोदी  भक्त  है नहीं तो ये केजरीवाल के साथी |
देखा  और  समझा  जाए  तो  ये  एक  भेड़ चाल  राजनीती  और  हम  सब  इसके  धीरे धीरे  शिकार  होते  जा  रहे  है  और  होते  रहेगा | जब  तक  हम  अपनी  सोच  और  अपने  विचारों को  आज़ाद  नहीं  करेंगे |
एक  तरफ  हम  नयी  नयी  टेक्नोलॉजी  का  फायदा  उठा  रहे  है  खुद  को  एक  मुकाम  तक  पहुंचाने के  लिए  परन्तु  साथ  में  उसके  दुष्प्रभावों  से  इतने  ग्रस्त  है  की  इस भूल भूलिया से  बहार  आना  नामुमकिन  सा  लगने  लगा है |
दिन  दूर  नहीं जैसे  वायरस  बनाने  वालो  ने  एंटी -वायरस  बनने  की योजना, एक तरह से लोगो को विशियस सर्किल में घूमने के लिए सार्थक साबित की, उसी  तरह, सोशल  मीडिया  का  एंटी -सोशल  मीडिया  टेबलेट्स  या  रेहाब  सेंटर्स  बनाएगा |
तो  सही  मायने  में  अगर  आप  किसी  चीज़  का  उपयोग  करना  चाहते  हो  तो  उससे  उसकी  ख़ूबसूरती  मत छीनना, उसको  झंजोरो  मत उसका. सदुपयोग एक दूसरे के साथ समाज को जोड़ने के लिए करो और हो सकते हो इन सब से दुर थोड़ा   समय  दोस्तों  के  साथ  चाय  पर  बिताओ , आकबरो  से  दोस्ती  करो  और  बचो  के  साथ  बचपन जियो |
रवि टोंडक

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