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योग:- स्वस्थ और निरोग बने रहने का अनमोल मन्त्र

योग:- स्वस्थ और निरोग बने रहने का अनमोल मन्त्र

योग:- स्वस्थ और निरोग बने रहने का अनमोल मन्त्र

डा. अवधेश कुमार श्रोत्रिय

क्रीड़ा अधिकारी, बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, ग्रेटर नॉएडा (उत्तर प्रदेश)

संस्थापक सचिव, प्ले इंडिया प्ले (ट्रस्ट)

importance of yoga - dwarkaexpress

बीते कुछ दिनों से समृद्ध और स्वस्थ भारत की कल्पना करने वाले चिंतको की जुबान पर और रायशुमारी में योग की प्रचारिता और महत्व के चर्चे बड़े ही संजीदगी भरे से हैं और होने के अनेको कारण वाजिब भी हैं जिनमे से प्रमुख हैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के अथक प्रयासों के चलते 11 दिसम्बर 2014 को  यूनाइटेड नेशन की जनरल असेंबली के द्वारा हर वर्ष 21 जून को अंतरष्ट्रीय योग दिवस मनाने के प्रस्ताव को सर्वसहमति से 177 देशो के  द्वारा स्वीकार करवाना और दूसरा प्रमुख कारण वर्ष 2016 के आखिरी महीने के शुरुआती दिनों में यूनाइटेड नेशन्स एजुकेशनल ,साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) द्वारा योग को भारत  की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्रदान करना भी एक अभूतपूर्व उपलब्धि हैं |

प्रचारिता की श्रंखला में अपनी कड़ी को भी जोड़ते हुए कुछ धर्म के ठेकेदारो नें बड़ी ही प्रचंडता से अपनी भूमिका निभाई हैं / निश्चित रूप से एक अद्भुत चिकित्सा पद्धति होने के बावजूद भी योग को एक धर्म विशेष से जोड़कर विरोध करने वालो को भी शायद मालूम तो होगा ही की योग के विभिन्न आसनो और ध्यान मुद्राओ से कैसे निरोगी काया के साथ साथ अनुशानात्मक जीवन शैली जीने के लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता हैं किन्तु उनकी नजरो में लगा हुआ धर्म का चश्मा शायद योग से मिलने वाली अभूतपूर्व शांति के एहसास से उन्हें मीलों दूर किये हुए हैं /  स्वस्थ एवं बलशाली बनने के लिए किये जाने वाले शारीरिक व्यायाम का न तो कोई धर्म होता हैं और न ही कोई जात होती हैं , ऐसे में योग को एक धर्म के विचारो से जोड़ना बेबुनियाद हैं / सही मायने में योग सम्पूर्ण शरीर की मांसपेशियों के लिए व्यायाम का सस्ता और सशक्त माध्यम हैं बस इसमें कुछ चुनिंदा आसनो के की बैठने की मुद्रा और साथ साथ किये जाने वाले मंत्रो का उच्चारण ही शायद एक धर्म विशेष की पूजा पद्धति से मिलता जुलता सा लगता हैं,  अन्यथा योग करने के दौरान ऐसा कुछ विशेष कार्य नहीं होता हैं जिससे की किसी भी धर्म के रीती रिवाजो को ठेस पहुंचे|

योग से शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य की प्राप्ति बड़ी ही सरलता से की जा सकती हैं /  योग से न सिर्फ हम अपने शरीर को स्वस्थ एवं मांसपेशियों को मजबूत बना सकते हैं बल्कि नियमित योगिक क्रियाओं से हम कई प्रकार के रोगों से भी अपने शरीर को  बचा सकते हैं नियमित योग करने से मन-मस्तिष्क की शांति और बेहतर स्वास्थ प्राप्ति की गारंटी सुनिश्चित होती हैं / कैंसर जैसी बीमारी के काट के लिए भी अब योग को एक हथियार के रूप में देखा जा रहा हैं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े शोधार्थियों के द्वारा और हालिया शोधों के माध्यम से यह पता लगाया हैं की बाल्यावस्था में ही अगर योग की विभिन्न गतिविधियों को नियमित रूप से स्कूली पाठ्यक्रम में सम्मिलित करे तो जल्द ही बालक और बालिकाओ के सर्वांगीड़ विकास की एक मजबूत आधारशिला रखी जा सकती हैं एवं प्रतिरोधक क्षमताओ को भी सशक्त किया जा सकता हैं /

विद्यालयों में योग की महत्वता को प्रमुखता तो काफी लंबे समय से दी जा रही हैं साथ ही साथ अब तनाव भरे माहौल से निजात दिलाने के लिए सरकारी कार्यालयों के अलावा कॉर्पोरेट सेक्टर्स में भी नियमति योग की कार्यशाला एवं सेशंस का आयोजन भी पिछले कई समय से बढ़ता जा रहा हैं जिसके फलस्वरूप कर्मचारियों में सकारात्मक  और निरोगी जीवन शैली के प्रति गंभीरता भी दिखने लगी हैं / अंततः इस बात में कोई दो तय नहीं हैं की वर्तमान समय में बेहतर स्वास्थ्य और निरोगी काया के लिए की जाने वाली योग द्वारा सरल साधना भी अब एक वैज्ञानिक प्रमाणिता का जटिल आधार बन गयी हैं /

मौजूद परिवेश में भागदौड़ भरे जीवन के चलते स्वयं के शरीर की उर्जाओ को संचित करकर तनावपूर्ण माहौल में भी रचनात्मक कार्य करने के लिए भी यौगिक क्रियाएं काफी पसंद की जा रही हैं लगभग हर उम्र के व्यक्ति के द्वारा / योग के द्वारा होने वालो विभिन्न प्रकार के लाभो का अनुमान  सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता हैं की अभी हाल ही में इसे विश्विद्यालय अनुदान आयोग एवं आयुष मंत्रालय के मेलजोल के बाद एक अलग विषय के रूप में मान्यता प्रदान करी गयी हैं और योग में गुडवत्ता वाले शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी में भी स्कॉलरशिप्स देने की योजना भी एक व्यापक रूप ले चुकी हैं /  बिना किसी मुलभुत आवश्यकता के और बिना ट्रेनर की मदद लिए शरीर के अंगो के कार्यशैली एवं मस्तिष्क  के मध्य बेहतर तालमेल बैठाने के लिए ध्यान समाधी लगानें के फायदे भी कई चिकित्सको और वैज्ञानिको को योग के क्षेत्र में अपना शोध कार्य परिसीमित करने की और अग्रसर हो रहे हैं /

चिकित्सा शास्त्र के क्षेत्र में नित नए आयामो को छूते छूते योग अब नशा मुक्ति केंद्र, एथलेटिक सेंटर्स और रिहैबिलिटेशन सेंटर्स में भी बड़ी ही संजीदगी से अपनी विशिष्ट उपस्तिथि दर्ज करा चूका हैं साथ ही साथ समाज सुधार की पहल में नकारात्मक दिशा से सकारात्मक दिशा की ओर मोड़ने के लिए बंदीगृह एवं सुधारगृहों में विभिन्न प्रकार की सुधारात्मक गतिविधियों में भी योग को एक अनिवार्य विषय के रूप में देखा जाने लगा हैं /  कमोवेश यह भी कुछ तथ्यात्मक आधार हैं योग से होने वालो लाभो के प्रति लोगो के जागरूक होने के /  पिछले कुछ वर्षो से अमेरिका के योग शिक्षको द्वारा योग के आधुनिक रूप “पावर योगा” को पश्चिमी देशो में प्रचारित करना भी एक बड़ी उपलब्धि ही हैं, हिंदुस्तान में जन्मे हुए योग के लिए , ऐसे ही नित नए योग के लेते हुए अनेको रूप भी यह दर्शाते हैं की योग अब धर्म की जंजीरो से निकलकर निरोगी जीवन जीने की चाह रखने वाले लोगो की दिनचर्या में शामिल हो चूका हैं /

वस्तुतः यह एक सामाजिक नियम ही हैं की जैसे जैसे किसी भी चीज की मांग लाभ को देखते हुए बढ़ती हैं तो उसमे धांधलियां भी उसी अनुपात में बढ़ती जाती हैं , योग की बढ़ती मांग के साथ साथ इस क्षेत्र में रोजगार की भी काफी प्रबल संभावनाएं देखी जा सकती हैं लेकिन साथ ही साथ योग के क्षेत्र में जल्द से जल्द पैसा कमाने के इच्छुक बिना डिग्री धारको एवं कौशलहीन फर्जी डिग्री धारक योग गुरुओ एवं शिक्षको की भरमार भी धड़ल्ले से बढ़ रही हैं जो की इस क्षेत्र की खूबसूरती एवं वस्तुनिष्ठा पर एक बदनुमा दाग भी लगा रही हैं / ऐसे में दुरुस्त और स्वस्थ भारत की नींव रखने के लिए सरकार और योग की प्राचीन संस्थाओ को फर्जी लोगो पर शिकंजा कसना चाहिए /

इस बात पर कोई अतिशयोक्ति किसी को भी होनी नहीं चाहिए की सांसारिक मोह एवं लोभ को त्यागते हुए अंतर्मन की शांति की प्राप्ति के लिए किये जाने वाले यौगिक क्रियाओं की व्यापकता अपरम्पार हैं , शायद इसलिए ही योग के फायदों के मुरीद लोगो की संख्या विश्व भर में कई हजार हैं /

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